➤ नेपाल भाग रहे आरोपियों को बॉर्डर पर आबकारी कर्मियों ने रोका, चोरी का माल आपस में बांटने का आरोप
➤ नौकरानी के फोन और बॉर्डर CCTV से खुला राज, करीब 80 फीसदी चोरी का सामान बरामद
शिमला/रुद्रपुर। शिमला के फिंगास्क एस्टेट में कारोबारी रेणु बालजीज के घर हुई एक करोड़ रुपये से अधिक की चोरी के मामले में जांच के दौरान बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हिमाचल पुलिस ने मामले में उत्तराखंड के आबकारी विभाग के एक सब-इंस्पेक्टर, एक कांस्टेबल और दो अन्य कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, चोरी का माल लेकर नेपाल भाग रहे आरोपियों को रुद्रपुर-रामपुर सीमा पर आबकारी चेकपोस्ट पर रोका गया था। आरोप है कि वहां बरामद सामान को आरोपियों के साथ मिलकर आपस में बांट लिया गया और उन्हें नेपाल जाने दिया गया।
हिमाचल पुलिस पिछले तीन दिनों से ऊधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर में डेरा डाले हुए थी। रविवार को आरोपियों से लंबी पूछताछ और बरामदगी की कार्रवाई के बाद सोमवार को चारों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, चोरी की गई संपत्ति की कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक है और अब तक करीब 80 फीसदी चोरी का सामान बरामद किया जा चुका है।
हालांकि, कारोबारी रेणु बालजीज के अनुसार चोरी हुए सोने और हीरे के आभूषण, चांदी के सिक्के, नकदी और करीब एक दर्जन महंगी घड़ियां अभी बरामद नहीं हुई हैं।
नशीला पदार्थ खिलाकर घर में की गई चोरी
मामला 7 सितंबर की देर रात का बताया जा रहा है। फिंगास्क एस्टेट निवासी कारोबारी रेणु बालजीज के घर काम करने वाली नेपाली नौकरानी करिश्मा पर आरोप है कि उसने खाने में नशीला पदार्थ मिला दिया। खाना खाने के बाद मालकिन के बेहोश होने का फायदा उठाकर उसने अपने तीन साथियों के साथ कथित तौर पर घर से कीमती सामान समेट लिया।
आरोपियों ने घर से सोने-हीरे के जेवरात, चांदी के सिक्के, महंगी घड़ियां और नकदी चोरी की और इसके बाद वहां से फरार हो गए।
शिमला से दिल्ली और फिर नेपाल भागने की तैयारी
वारदात के बाद आरोपी शिमला से दिल्ली पहुंचे। इसके बाद उन्होंने स्विफ्ट डिजायर कार से रुद्रपुर होते हुए नेपाल जाने की योजना बनाई। बताया गया है कि 8 सितंबर की सुबह करीब 11 बजे वे रुद्रपुर-रामपुर सीमा पर स्थित आबकारी चेकपोस्ट पर पहुंचे।
यहीं से पूरे मामले में एक नया मोड़ आया।
चेकपोस्ट पर पकड़ा गया चोरी का माल
आरोपियों की कार को आबकारी चेकपोस्ट पर तैनात कर्मचारियों ने जांच के लिए रोका। जांच के दौरान कार से कथित तौर पर करोड़ों रुपये का चोरी का सामान बरामद हुआ।
पुलिस के मुताबिक, यहीं पर आबकारी विभाग के कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध हो गई। आरोप है कि सामान बरामद करने के बाद कर्मचारियों ने उसे आधिकारिक तौर पर जब्त करने के बजाय आरोपियों के साथ मिलकर आपस में बांट लिया और आरोपियों को नेपाल जाने दिया।
इस पूरे घटनाक्रम में आबकारी दरोगा, कांस्टेबल और दो अन्य कर्मचारियों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है।
नेपाल पहुंचकर नौकरानी ने मालकिन को किया फोन
मामले में सबसे अहम कड़ी उस समय सामने आई, जब नेपाल पहुंचने के बाद नौकरानी करिश्मा ने अपनी मालकिन को फोन किया। बताया गया कि उसने फोन पर जानकारी दी कि चोरी किया गया अधिकांश सामान रुद्रपुर में आबकारी और पुलिसकर्मियों ने जब्त कर लिया है।
इस सूचना के बाद मामले की दिशा बदल गई और हिमाचल पुलिस ने रुद्रपुर पहुंचकर जांच शुरू की।
CCTV फुटेज ने खोला बॉर्डर का राज
हिमाचल पुलिस ने ऊधमसिंह नगर पुलिस के सहयोग से रुद्रपुर-रामपुर सीमा और चेकपोस्ट के CCTV फुटेज खंगाले। फुटेज में कथित तौर पर आबकारी कर्मचारियों को कार की जांच करते और चोरी के माल से संबंधित गतिविधियों में शामिल देखा गया।
इसके बाद पुलिस ने संदिग्ध कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की। जांच और पूछताछ के बाद चोरी के माल की बरामदगी की गई और चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में चोरी करने वाले मूल आरोपियों के साथ-साथ बरामद चोरी की संपत्ति को कथित तौर पर हड़पने और आपस में बांटने वाले कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
इन चार कर्मचारियों की हुई गिरफ्तारी
मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शामिल हैं:
- देवेंद्र कुमार — आबकारी दरोगा, रामनगर
- बलजीत सिंह — आबकारी कांस्टेबल, किच्छा
- पप्पू लाल — उपनल कर्मचारी, गदरपुर
- नईम — पीआरडी जवान, केलाखेड़ा
हिमाचल पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ चोरी के माल की बरामदगी भी की है। पुलिस के मुताबिक करीब 80 प्रतिशत संपत्ति बरामद हो चुकी है। वहीं, कारोबारी के घर से चोरी हुए सोने-हीरे के आभूषण, चांदी के सिक्के, नकदी और करीब एक दर्जन घड़ियों की बरामदगी अभी बाकी बताई जा रही है।
इस मामले ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि चोरी की वारदात के बाद नेपाल भाग रहे आरोपियों को बॉर्डर पर रोकने के बाद बरामद चोरी के सामान की कथित तौर पर हेराफेरी किए जाने का आरोप सामने आया है। अब पुलिस की जांच में यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि चोरी का कितना सामान किसके पास पहुंचा और बरामदगी के बाद कितनी संपत्ति अभी भी गायब है।



